आज के समय में मोबाइल, लैपटॉप, कार, एसी, वॉशिंग मशीन से लेकर मिसाइल और सैटेलाइट तक – हर जगह सेमीकंडक्टर चिप का इस्तेमाल होता है। अभी तक भारत इन चिप्स के लिए ज़्यादातर विदेशों पर निर्भर रहा है। यही वजह है कि सरकार अब इस क्षेत्र को देश के अंदर मजबूत करना चाहती है।
इसी सोच के साथ India Semiconductor Mission (ISM) की शुरुआत हुई थी, और अब इसके अगले चरण यानी ISM 2.0 को और ज्यादा असरदार बनाने की तैयारी है। इस नए चरण में सरकार ने सेमीकंडक्टर कंपनियों को सपोर्ट देने के लिए नए इंसेंटिव्स और स्किल डेवलपमेंट पर खास फोकस रखा है।
ISM 2.0 आखिर है क्या?
India Semiconductor Mission (ISM) केंद्र सरकार की एक राष्ट्रीय पहल है, जिसे Ministry of Electronics and Information Technology (MeitY) चला रही है। इसका मकसद भारत को सेमीकंडक्टर डिजाइन और मैन्युफैक्चरिंग का बड़ा केंद्र बनाना है।
ISM 2.0 को पहले चरण से इसलिए अलग माना जा रहा है क्योंकि इसमें सिर्फ फैक्ट्री लगाने की बात नहीं हो रही, बल्कि यह भी देखा जा रहा है कि कौन-कौन से लोग इन फैक्ट्रियों में काम करेंगे और उन्हें कैसे तैयार किया जाएगा।
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₹1,000 करोड़ के नए इंसेंटिव्स का मतलब क्या है?
यहाँ यह समझना ज़रूरी है कि ₹1,000 करोड़ की राशि सीधे छात्रों को नहीं दी जा रही है। यह पैसा मुख्य रूप से उन कंपनियों और संस्थानों के लिए है जो भारत में:
- सेमीकंडक्टर चिप बनाना चाहती हैं
- चिप डिजाइन और टेस्टिंग का काम करेंगी
- पैकेजिंग और असेंबली यूनिट्स लगाएंगी
जब ऐसी कंपनियाँ भारत में आएंगी, तो उनके साथ हज़ारों नई नौकरियाँ, इंटर्नशिप और ट्रेनिंग प्रोग्राम भी आएंगे। इसी वजह से यह योजना छात्रों के लिए भी बहुत अहम मानी जा रही है।
इंजीनियरिंग छात्रों के लिए ISM 2.0 क्यों ज़रूरी है?
अब तक ज़्यादातर इंजीनियरिंग छात्र IT या सॉफ्टवेयर सेक्टर की तरफ जाते थे। लेकिन ISM 2.0 के बाद कोर टेक्नोलॉजी सेक्टर में भी बड़े मौके बनने लगे हैं।
अगर आप Electronics, Electrical, Computer Science या Mechanical Engineering से जुड़े हैं, तो सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री आपके लिए एक नया और स्थिर करियर ऑप्शन बन सकती है। यह सेक्टर केवल नौकरी ही नहीं देता, बल्कि लंबे समय तक ग्रोथ भी देता है।
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किन छात्रों को सबसे ज़्यादा फायदा हो सकता है?
इस मिशन का सबसे ज़्यादा असर उन छात्रों पर पड़ेगा जो टेक्नोलॉजी की गहराई में जाना चाहते हैं। खासकर Electronics और ECE छात्रों के लिए चिप डिजाइन, VLSI और टेस्टिंग जैसे क्षेत्रों में नए रास्ते खुल सकते हैं।
Computer Science के छात्र भी पीछे नहीं रहेंगे, क्योंकि आजकल AI चिप्स, ऑटोमेशन और डिजाइन सॉफ्टवेयर में कोडिंग की बड़ी भूमिका है। इसके अलावा Mechanical और Material Science से जुड़े छात्रों को भी फैब्रिकेशन यूनिट्स में काम करने के मौके मिल सकते हैं।
ISM 2.0 से पढ़ाई और ट्रेनिंग में क्या बदलाव आएगा?
सरकार और इंडस्ट्री मिलकर यह कोशिश कर रही हैं कि कॉलेजों में पढ़ाई सिर्फ किताबों तक सीमित न रहे। आने वाले समय में कई संस्थानों में:
- सेमीकंडक्टर से जुड़ी नई लैब्स
- इंडस्ट्री के साथ मिलकर कोर्स
- प्रैक्टिकल और प्रोजेक्ट आधारित ट्रेनिंग
जैसी चीज़ें देखने को मिल सकती हैं। इससे छात्रों को पढ़ाई के साथ-साथ रियल इंडस्ट्री एक्सपीरियंस भी मिलेगा।
भारत में सेमीकंडक्टर सेक्टर की मौजूदा स्थिति
पिछले कुछ सालों में भारत में इस सेक्टर को लेकर कई बड़े ऐलान हुए हैं। Tata Electronics, Micron Technology और कुछ अन्य ग्लोबल कंपनियाँ भारत में निवेश कर रही हैं। इन सभी प्रोजेक्ट्स को ISM के तहत सरकारी समर्थन मिलता है।
यह संकेत है कि सरकार इस मिशन को सिर्फ कागज़ों तक सीमित नहीं रखना चाहती, बल्कि इसे ज़मीन पर उतारने पर काम कर रही है।
ISM 2.0 से जुड़ी जरूरी जानकारी
| बिंदु | विवरण |
|---|---|
| योजना का नाम | India Semiconductor Mission (ISM) |
| नया चरण | ISM 2.0 |
| मुख्य उद्देश्य | चिप मैन्युफैक्चरिंग और स्किल डेवलपमेंट |
| घोषित सपोर्ट | ₹1,000 करोड़ (इंडस्ट्री इंसेंटिव) |
| लाभ | कंपनियाँ, छात्र, स्टार्टअप्स |
| मंत्रालय | Meity |
छात्र अभी से क्या कर सकते हैं?
अगर आप इंजीनियरिंग स्टूडेंट हैं, तो अभी से सेमीकंडक्टर से जुड़ी बेसिक जानकारी लेना शुरू कर सकते हैं। VLSI, चिप डिजाइन और इलेक्ट्रॉनिक्स की नींव मजबूत करना आगे चलकर बहुत काम आएगा। इसके साथ-साथ सरकारी और आधिकारिक घोषणाओं पर नज़र रखना भी ज़रूरी है।
आधिकारिक और भरोसेमंद जानकारी कहाँ देखें?
किसी भी अफवाह या गलत खबर से बचने के लिए हमेशा सरकारी वेबसाइट देखें:
Ministry of Electronics & IT वेबसाइट
छात्रों के आम सवाल
क्या ISM 2.0 में छात्रों के लिए कोई अलग फॉर्म है?
नहीं, अभी कोई सीधा आवेदन नहीं है। लेकिन इससे बनने वाले अवसर छात्रों के लिए हैं।
क्या यह योजना लंबे समय तक चलेगी?
हाँ, सेमीकंडक्टर सेक्टर को सरकार लंबी अवधि की रणनीति मान रही है।
क्या फ्रेशर्स को नौकरी मिलेगी?
जैसे-जैसे इंडस्ट्री बढ़ेगी, फ्रेशर्स के लिए भी मौके बढ़ेंगे।
निष्कर्ष
ISM 2.0 भारत को टेक्नोलॉजी के मामले में आत्मनिर्भर बनाने की एक गंभीर कोशिश है। इंजीनियरिंग छात्रों के लिए यह सिर्फ एक खबर नहीं, बल्कि भविष्य की तैयारी का संकेत है। जो छात्र आज से सही दिशा में सीखना शुरू करेंगे, वे आने वाले वर्षों में इस तेजी से बढ़ते सेक्टर का हिस्सा बन सकते हैं।
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